रानीपोखरी: शिक्षा के मंदिर पर विस्थापन की मार? लॉ यूनिवर्सिटी की भूमि को लेकर जन-आक्रोश तेज
बीते कई दिनों से चल रहे इस धरने में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। आंदोलनकारियों ने सरकार और शासन को स्पष्ट चेतावनी दी है:
शिलान्यास का सम्मान हो: जिस जमीन का शिलान्यास हो चुका है, उसका स्वरूप नहीं बदला जाना चाहिए।
युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद हो: लॉ यूनिवर्सिटी बनने से क्षेत्र में रोजगार और शिक्षा के अवसर पैदा होंगे, जिसे छीना जा रहा है।
विस्थापन का वैकल्पिक रास्ता: ग्रामीणों का कहना है कि वे विस्थापितों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन शिक्षा के लिए सुरक्षित भूमि की बलि देना तर्कसंगत नहीं है।
युवाओं से मार्मिक अपील
धरना स्थल से युवाओं के नाम एक संदेश जारी किया गया है— "यह लड़ाई सिर्फ एक टुकड़ा जमीन की नहीं है, यह लड़ाई उत्तराखंड के आने वाले कल की है। यदि आज हम चुप रहे, तो कल हमारी आने वाली पीढ़ियां हमसे सवाल पूछेंगी कि जब हमारे हक की यूनिवर्सिटी छीनी जा रही थी, तब हम कहाँ थे?"
पहाड़ टाइम्स 24 का विश्लेषण
सरकार को यह समझना होगा कि विकास और विस्थापन के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। एयरपोर्ट विस्तार राज्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन शिक्षा के स्थापित प्रोजेक्ट को रोकना 'रिवर्स माइग्रेशन' और 'पहाड़ के विकास' के दावों पर सवाल खड़े करता है।
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Labels: Law University Ranipokhari Protest, रानिपोखरी लॉ यूनिवर्सिटी भूमि विवाद



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